एहसास


मुझे पता न था, कि हम इतने सताये होगे;
कल जो अपने थे, वही लोग पराये होगे।
जिन्दगी सिखा ही देती है, जीने का अदब;
क्या पता हमने, कितने गम-खाये होगे।

Comments

  1. बहुत बढ़िया!
    लगता है गहरी चोट खाए हो!

    ReplyDelete
  2. सार्थक और भावप्रवण रचना।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

शाम है और गुफ़्तगू भी

'I' between me and myself

खुद को ही पाउँ