सोच के डब्बे


हम इंसान है
हमारी सोच
हमारे चारो तरफ कि बातों पर निर्भर करती है
बचपन से लेकर अब तक की
सारी बातों पर
हम सोच और विचार के डब्बों में बंद होते हैं
कुछ बहुत बड़े डब्बों में बंद हैं
कुछ बड़े डब्बों में
कुछ छोटे
और कुछ बेहद छोटे डब्बों में
डिब्बों का आकर हमारे आयाम तय करता है
कई बार हम अपने चारो तरफ के इस डब्बे को लोहे सा मजबूत बना देते हैं
और उससे बहार नहीं आना चाहते
हाँ कई बार दीवारें कितनी मजबूत हों
वक़्त के साथ हमारी सोच बदलती है
और एक दिन हम उनसे बहार ही जाते हैं
यहाँ मैंने जो लिखा
वो मेरे उपर भी लागू है
बिलकुल उसी तरह
पर हम सभी को तोडनी है
ये दीवारें
और बना लेंगे एक रास्ता
एक दिन ये होगा जरूर..........

Comments

  1. बहुत सुन्दर | हृदयग्राही ||

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  2. इन डब्बों से खुद ही बाहर आना होता है ...

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  3. मुझे तो सबसे अच्छा तब लगेगा ....
    जब अपने सोच के डब्बे को दूसरे सोच के डब्बे से अदलाबदली कर लूं
    बिलकुल उस बच्चे की तरह जो डब्बों से खेला करता है
    जब लगे अब डब्बा पुराना हो गया है , तो झट से तोड़ डालूं उस डब्बे को
    '''लेकिन सच तो यह है की बच्चे होकर हम डब्बे से खेला करते थे
    अब डब्बे हमको खेलाते है.

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  4. सोच कोई रोक कर रखी जाने वाली वस्‍तु नहीं है चाहे फिर वो हमारे सामाजिक सारोकारों की सोच हो, हमारी सभ्‍यता और संस्‍कृति की सोच होा यह तो निरन्‍तर बहती रहने वाली नदी की तरह है जिसमें सदैव ताजगी बनी रहती हैा इसे एक जगह बन्‍द रखदिया जाय तो सडांध पैदा होने लगेगीा बहरहाल इस श्रेष्‍ठ रचना के लिये आपको बधाई देता हूंा

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  5. इन डब्बों पर अद्भुत अभिव्यक्ति है| इतनी खूबसूरत रचना की लिए धन्यवाद|

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  6.  अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  7. डिब्बों के ज़रिये बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  8. जो इन डिब्बों के खोल से बाहर निकल पाटा है वही बुद्धत्व को प्राप्त होता है.. बेहतरीन रचना!!

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  9. कभी कभी कमरे की दीवारों के पिंजरे को तोड़ कर मन पंछी उडान भरना चाहता है ॥

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  10. सोच के डिब्बे यदि लोहे के होगे तो सब से दूर हो जाएंगे |कम से कम पता तो होना चाहिए हर डिब्बे हें क्या बंद किया है |
    आशा

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  11. सोच कई बार एक डिब्बे से दूसरे में भी पहुँच जाती है ... अच्छी प्रस्तुति

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  12. This comment has been removed by the author.

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  13. बहुत सुन्दर रचना।

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  14. सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई रचना ...

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  15. bahut achchi sochwalaa dibba.jiske ander itani sunder gajal hai.badhaai aapko.

    / ब्लोगर्स मीट वीकली (३) में सभी ब्लोगर्स को एक ही मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है / आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ कोब्लॉगर्स मीट वीकली (3) Happy Friendship Day में आप आमंत्रित हैं /

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  16. Bahut sahi kahi aapne.. Aabhar,,

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  17. बिल्कुल। डिब्बे वाटर टाइट कम्पार्टमेण्ट हैं। एक दूसरे से अप्रभावित (?) लैगून।
    हममें ही कुछ है जो उन्हे वाटर टाइट रखना चाहता है।
    बहुत सुन्दर कविता।

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