Tuesday, 26 April 2011

प्रतीक्षा


घर की बिखरी हुई वस्तुएं
मै समेटना चाहता हूँ जिन्हें,
की वो अपने पूर्ण सौंदर्य में हों
मेरे हृदय अंतस्थल पर बिखरी हुई ,
उसके साथ बिताये पल की यादें
मैं संजोना चाहता हूँ जिन्हें,
कि मैं उस पल को पूरी तरह जी सकूँ
उसके आने का दिन !
मैंने सहेजा है घर में बिखरी वस्तुएं
इस एहसास के साथ कि उसके आने से ,
फिर से जीवन होंगे उसके साथ बिताये पल के अनुभव
मैं संजो लूँगा उसके साथ बिताये पल को
आह! ये इंतज़ार बरसों का लगता है
अब बस वो जाए !

8 comments:

  1. kya baat hai sir ji,.,.,. waise kiska intzaar ho raha hai,.,. :)

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  2. अपना गम लेके कहीं और न जाया जाए,
    घर में बिखरी हुयी चीज़ों को सजाया जाए!!

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  3. सुमन जी आपका आभार!
    सलिल जी आपने बहुत खूब कहा.

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  4. बहुत बढ़िया!
    लिखते रहो, सुधार और निखार आता जाएगा!

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  5. बहुत बढ़िया!
    लिखते रहो, सुधार और निखार आता जाएगा!

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