Friday, 15 April 2011

दर्द


अपने दिल का हर दर्द बड़ा होता है;
दूसरे का हो, तो पराया होता है
कहते हैं, कोई कन्धा नहीं है रोने को;
क्या हमने भी साथ निभाया होता है

3 comments:

  1. छोटी-छोटी और भा से ओत्प्रोत कविताए पसन्द आई.
    मुसाफिर का यह कविता का सफर अनवरत जारी रहे.

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  2. बस आपका आशिर्वाद साथ रहे, सब थीक रहेगा

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  3. बढ़िया मुक्तक है।
    लिखते-लिखते निखार आता जाएगा!

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