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इस दुनियावी सफ़र में अब रखा क्या है.

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सफ़र है जिंदगी, और यहाँ होता क्या है; जो भी मिलता है, वो भी मिलता क्या है.
जिंदगी के सफ़र पर निकले हो तुम; सिवा मौत के अपना पराया क्या है.
एक मोहब्बत ही तो है दिल मे तेरे; लूटा दे यूँ भी पास तेरे रखा क्या है.
समझना था राह की मुश्किलों को तुम्हें; और समझना था की ये दुनिया क्या है.
घर को लौट ही चल 'मुसाफिर' अब तूँ; इस दुनियावी सफ़र में अब रखा क्या है.