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Showing posts from May, 2014

फ़ुर्सत में कहां हूं मैं

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मैं समंदर हूं कि हवा हूं मैं; नहीं हूं खुद में तो कहाँ हूं मैं|
लम्हें वो जिनको ज़ी नहीं पाया; उन ही लम्हों को जोड़ता हूँ मैं|
सांस बिखरी हों या तेरी यादें; एक तड़फ़ है जो ज़ी रहा हूं मैं|
एक अरसा हुआ देखे तुझको; अरसा पहले ये पल जिया हूं मैं|
मिलना फ़ुर्सत से सफ़र के बाद; 'मुसाफिर' हूं फ़ुर्सत में कहां हूं मैं|

कुछ साँसों को जिंदगी से अलग कर दूं

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चाहता हूं कुछ साँसें अपनी जिंदगी से अलग कर दूं
वो जो तुम्हारी यादों के साथ ली थी मैं ने
और जिनके साथ घुली हवा मेरे रक्त में समा गयी
जो मेरे रक्त के साथ सीने से होते हुए
मेरे दिल और दिमाग़ में अपनी जगह बना चुकी है
और जिसने तुम्हारे यादों का असर और गहरा कर दिया है
मैं चाहता हूं तुम्हारी याद का हर असर ख़त्म कर दूं
मैं चाहता हूं कुछ साँसों को अपनी जिंदगी से अलग कर दूं