Sunday, 17 April 2011

तुम आ जाओ !


मुझको, लोग जो कहने लगे है पागल,
तुम जाओ तो सब पहले जैसा हो जाए

मेरे अश्क भी अब सूख गये लगते है,
तुम जाओ तो आँखों में नमीं हो जाए

मैने इतने दिनों दिल को भुलावा है दिया,
तुम जाओ तो हर झूठ सच हो जाए

मैं अंधेरो में तलाशता रहा मुकद्दर को,
तुम जाओ तो रौशनी सी हो जाए



6 comments:

  1. बहुत बढ़िया।
    इन्तजार का फल मीठा होता है।

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  2. इंतजार ही है.

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  3. बहुत पसंद आया आपका यह ब्लॉग !! मेरी तरफ से २ पंक्तियां हें.....!!!

    प्यार थोडा सा भी मिल जाय तो सम्भाल के रखना,
    क्यूंकि प्यार अनमोल है इसका कोई दाम नहीं होता !

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  4. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  5. फुर्सत मिले तो 'आदत.. मुस्कुराने की' पर आकर नयी पोस्ट ज़रूर पढ़े .........धन्यवाद |

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राम

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