Thursday, 28 March 2013

गम की धूप, छाँव खुशी की मिली होती


गम की धूप, छाँव खुशी की मिली होती;
थोड़ा आसमान थोड़ी ज़मीन मिली होती.

कहाँ माँगता हूँ,चाँद मिले आँचल में;
चाहतें थी थोड़ी रोशनी मिली होती.

दौड़ता भागता रहा जिंदगी के लिए;
दौड़ते भागते ही जिंदगी मिली होती.

तुम से बेहतर यक़ीनन कोई  ख़याल न था;
हक़ीकत में भी अगर तुम कहीं मिली होती.

अमीरी भी 'मुसाफिर' को मिल गयी होती;
मुसाफ़िरी जो कहीं फकीरों की मिली होती.

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर....होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
    पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...

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    1. देर से सही, आपको भी होली की बधाई.
      अपने ब्लॉग का लिंक दे कृपया|

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  2. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति,आभार.

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    1. अभिवादन सहृदय आभार !!!

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  3. bhai waah ... thodi si roshni ki chaah liye .. lajawaab sher sabhi ...

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    1. प्रणाम!
      बहुत बहुत आभार !!!

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