Tuesday, 26 March 2013

रंगरेजवा

मोरे रंगरेजवा 
तोरे बिना होली बेकार रे!

गूलर जइसन लाल,
कनेरवा जइसन पीयर,
कई दे मनवा हरियर पीयर,
तोरे बिन सब रंगवा भईल बेकार!
मोरे रंगरेजवा 
तोरे बिना होली बेकार रे!

तन तो रंगाई,
मोरा मन न रंगाई,
मन के रंगाए बिना,
सब बेकार रे!
मोरे रंगरेजवा 
तोरे बिना होली बेकार रे!

नील ई आकाशवा,
हरियर धरतिया,
तोहरे ही रंग मे गईल सब रंगाई रे!
मोरे रंगरेजवा 
तोरे बिना होली बेकार रे!

सांवर भय तो जाईसे किशन के लेखिन,
मन रंग दे कि जैसे उजियार रे!
मोरे रंगरेजवा 
तोरे बिना होली बेकार रे!

10 comments:

  1. अच्छा काम बोलता है | हमें कल के लिए करना है ताकि बच्चे यह न कह सके कि क्यों नहीं बनवाई डामर की पक्की सड़क |

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रणाम !!!
      उम्मीद है, हम और अच्छा करें, ताकि शिर उठा कर कहें कि हम हिन्द से हैं और हमें हिन्द पर नाज है!!!

      Delete
  2. होली की महिमा न्यारी
    सब पर की है रंगदारी
    खट्टे मीठे रिश्तों में
    मारी रंग भरी पिचकारी
    ब्लोगरों की महिमा न्यारी …………होली की शुभकामनायें

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार!!!
      होली की शुभकामनाएं|

      Delete
  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,होली की हार्दिक शुभकामनाये.
    होली प्रेम प्रतीक है, भावों का है मेल
    इसे समझिये न कभी, रंगों का बस खेल

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार!!!
      होली की शुभकामनाएं|

      Delete
  4. मोरे रंगरेजवा
    तोरे बिना होली बेकार रे!
    क्या बात है ऐसी रचना आप ही कर सकते हैं ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. बेल्लेरोसे न्यू यॉर्क यही दिखा रहा की आप हमारी ब्लॉग पर आये हैं|

      बहुत बहुत आभार!!!

      Delete
  5. ई रंगरेजवा है कौन -भाग गया है इंगलिस्तान का ?

    ReplyDelete
    Replies
    1. हमहू खोजत रहली मिलल नहीं!!!

      Delete

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष खाना पकाने में कुशल होते हैं क्यों की सुंदर वही होता है जो भीतर मन से पका ह...