Saturday, 19 January 2013

सागर से गहरा होता है


सागर से गहरा होता है;
दिल का जो रिश्ता होता है।

खोजोगे फिर शहर-शहर तुम;
यहाँ कौन किसका होता है।

जान ही लोगे, देर से लेकिन;
और यहाँ क्या क्या होता है।

हमने जो सोचा होता है;
अंजाम कहाँ वैसा होता है।

हमने भी देखें हैं दुश्मन;
इंसान का इंसान होता है।

क्या खोज रहे हो बाज़ारों में;
यहाँ तो बस सौदा होता है।

तुमको मुक़द्दर चाहिये अपना;
और यहाँ पैसा लगता है।

तुम मुफ़लिस हो मेरे 'मुसाफिर';
प्यार कहाँ माँगे मिलता है।               

8 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 23/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. ज्यादे से ज्यादे लोगों तक रचना पहुचाने का उद्यम करने के लिए आपका सहृदय आभार!!!

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  2. Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    ram ram bhai मुखपृष्ठ रविवार, 20 जनवरी 2013 .फिर इस देश के नौजवानों का क्या होगा ? http://veerubhai1947.blogspot.in/
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    1. बहुत बहुत आभार !!!

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  3. बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति .
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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    1. जी जरूर
      सहृदय आभार !!!

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  4. Replies
    1. बहुत बहुत आभार !!!

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