Saturday, 23 June 2012


यूँ तेरा आना;
मेरे दिल का लुट जाना.

तुझसे मिलना;
जैसे मेरा खो जाना.

हवाओं कहना;
क्या होता है होना दीवाना.

बादल ने जाना;
कैसे इतराना है, इठलाना.

धरती ने जाना;
प्यार के बूँदो को तरस जाना.

पेड़ों ने जाना;
झूम, हवाओं से मिलके जाना.


यूँ तेरा आना;
मेरे दिल का लुट जाना.

15 comments:

  1. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार
    नई पोस्ट .....मैं लिखता हूँ पर आपका स्वगत है

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  2. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

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    1. सहृदय आभार !!!!
      उम्मीद है आप आते रहेंगे समय निकल कर.

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    2. बहुत सुन्दर, बधाई.

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    3. आपका बहुत बहुत आभार S.N.Shukla जी

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  3. उनके आने पे दिल का लुटना तो लाजमी है ...
    अच्छी रचना है ...

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    1. हौसलाफजाई के लिए सहृदय धन्यवाद!!!!!!
      लिखने के लिए नई ऊर्जा मिलाती है.

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  4. Replies
    1. उदय वीर सिंह जी आपका सहृदय आभार !!!!!

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  5. कौन लुटा और कौन लूटा
    बहुत सुन्दर

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    1. M.VERMA ji सहृदय आभार !!!!!!!!

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