Friday, 30 December 2011

जिंदगी का राज


मुझे ये जिंदगी का राज समझ आया करीने से,
कि खुश्बू फूल की आती है मेहनत करके जीने से।

तुम्हे कतरा कह कर लोग ठुकराए तो भी क्या,
समंदर बनके निकले मोहब्बत,बूँद के ही सीने से.

रोटी बनती नही है रुपये दौलत या नगीने से.
आगर न सीँचे मिट्टी आदम का घीसू पसीने से।

घुटन सी एक मैं महसूस करता हूँ शहरों मे,
यहाँ अब दिन गुज़रते है बरसों या महीने से.

चलो रुख़ कर लो 'मुसाफिर' गावों की तरफ फिर से,
मिला है क्या तुम्हे इस शहर मे घुट घुट के जीने से.

6 comments:

  1. ज़मीन से जुड़े लोग अक्सर इस मनोदशा से गुजरते हैं.. बस यह जुड़ाव बना रहे यही कामना है!!
    नववर्ष की शुभकामनाएं!!

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छे विचार !!
    नया वर्ष मुबारक हो !!

    ReplyDelete
  3. आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  4. bahut sunder prastuti.aur utne hi sunder bhav

    ReplyDelete
  5. क्या आपकी उत्कृष्ट-प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चामंच

    की कुंडली में लिपटी पड़ी है ??

    charchamanch.blogspot.com

    ReplyDelete

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष खाना पकाने में कुशल होते हैं क्यों की सुंदर वही होता है जो भीतर मन से पका ह...