Wednesday, 26 July 2017

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है
की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष
खाना पकाने में कुशल होते हैं

क्यों की सुंदर वही होता है
जो भीतर मन से पका हुआ (परिपक्व) हो
जो ख़ुद को पकाने में कुशल हो

और दुनिया की सारी बहादुर स्त्रियाँ
निकलती हैं घर से बिना परवाह किए
की कौन क्या सोचता है, या कहता है

क्यों की बहादुर वही होता है
जो स्वयं को यूँ जीत ले
कि दूसरों की परवाह न करे

दुनियाँ के सारे सुंदर पुरुष
हार जाते है बहादुर स्त्रियों से
प्रेम में हार जाना ही जीत है

9 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 18वां कारगिल विजय दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (28-07-2017) को "अद्भुत अपना देश" (चर्चा अंक 2680) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. वैसे भी सब कुछ उलट-पुलट हो रहा है !

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  4. इस अनाम रचना के रचइता कौन हैं?
    अच्छा लिखा

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. पढ़ने के लिए और सराहने के लिए धन्यवाद्
      ब्लॉग भी हमारा है और रचना भी
      ब्लॉग पर सब कुछ स्वरचित ही है

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    3. कितना ओढ़ा, कितना बिछाया,
      रिस-रिस कर, कितना जी पाया

      इस ब्लॉग पर सब स्वरचित है

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