प्रेम

सुनो,
संसार में खोजे बनाये गये सारे शब्द, झूठे हो जाते है,
क्यों की ये सारे शब्द मिल कर भी एक शब्द 'प्रेम' की व्याख्या नहीं कर पाते।
और अंतत: यह शब्द 'प्रेम' भी झूठा हो जाता है,
क्यों की इस शब्द की आवाज़ भी बता नहीं सकती की ये क्या है।
और जब सारे शब्द और विचार को हम छोड़ देते है,
तब गहरे हमारे भीतर जो शून्य बचता है,
वहाँ प्रेम स्थापित कर लेता है खुद को, शब्द से परे, शरीर से परे एक उर्जा के रूप में।
अनंत से अनंत तक फैली उर्जा, जिसे जानने ते लिये उस के अनुभव से गुज़रना होगा, शब्द को छोड़ कर।

Comments

Popular posts from this blog

विरह गीत

मृत्यु तुम से बिना डरे

ख़्वाब के पार