Wednesday, 14 September 2011

तुम सुगंध हो मेरी


तुम सुगंध हो मेरी
मैं पवन हूँ तेरा
मिल तू जाए अगर
तो ये जीवन मेरा ।

चाँद को चाहिए
चाँदनी, और क्या
तू नहीं है तो फिर
क्या ये जीवन मेरा

है मेरे जो नयन
अश्रु पूरित यहाँ
मन में मेरे जो है
बस वो चेहरा तेरा

शाम की रोशनी
मुझको अच्छी लगे
पास तू है नहीं
सुबह का उजाला तेरा

आश दिल में मगर
है एक बाकी अभी
वो बन के आये
सुबह का जाला मेरा

9 comments:

  1. बहुत अच्छी रचना है, ज्ञानेंद्र जी .....
    "आश दिल में है मगर .....
    आगे भी चलते रहे कविताओं का यह सफर....."

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया.आपकी मनोकामना पूर्ण हो.

    ReplyDelete
  3. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

    ReplyDelete
  4. bahu sunder bhavabhivyakti.........sunder ahsaso se sajaya hai aapne...aabhar

    ReplyDelete
  5. भावों की अच्छी अभिव्यक्ति , सुंदर प्रेममयी रचना बधाई

    ReplyDelete
  6. भीनी भीनी ...सुगंध प्यार की...बहुत खूब

    --

    ReplyDelete

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष खाना पकाने में कुशल होते हैं क्यों की सुंदर वही होता है जो भीतर मन से पका ह...