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जीवन सफ़र
सबके अपने रास्ते अपने अपने सफ़र रास्तों के काँटे अपने अपने अपने दर्द अपनी अपनी मंज़िल अपना अपना दुख अपनी अपनी चाहते अपना अपना सुख सबकी अप...
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पास आ कातिल मेरे मुझमें जान आने दे , जान ले लेना पर थोडा तो संभल जाने दे। तू तसव्वुर में मेरे रहा है बरसों से ,...
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अभिभूत हूँ उस प्रेम से, जो घटित हुआ एक पल में, और जीवंत रहेगा, सदियों तक। एक अपरिचित का प्रेम, उस के पलकों के कोरों पर रुके, अश्रु के...
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मैं समंदर हूं कि हवा हूं मैं; नहीं हूं खुद में तो कहाँ हूं मैं| लम्हें वो जिनको ज़ी नहीं पाया; उन ही लम्हों को जोड़ता हूँ मैं| ...

सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज मंगलवार (10-09-2013) को मंगलवारीय चर्चा 1364 --गणेशचतुर्थी पर विशेषमें "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
आप सबको गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत आभार!!!
Deleteज्यादे लोगों से साझा करने के लिए धन्यवाद्!!
ई देहिया से पीछा चुडावल तनि मुश्किल दिखत बा … बड़ा सुन्दर प्रस्तुती।
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार!!!
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