अगर होता इश्क का कही पैमाना कोई;
न होता जहाँ में फिर कही मैखाना कोई ।
मैं ढूढता फिरता हूँ तुम्हे जो इन गलियों में;
लोग कहते हैं होगा यहीं वो दीवाना कोंई।
Thursday, 10 March 2011
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जीवन सफ़र
सबके अपने रास्ते अपने अपने सफ़र रास्तों के काँटे अपने अपने अपने दर्द अपनी अपनी मंज़िल अपना अपना दुख अपनी अपनी चाहते अपना अपना सुख सबकी अप...
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पास आ कातिल मेरे मुझमें जान आने दे , जान ले लेना पर थोडा तो संभल जाने दे। तू तसव्वुर में मेरे रहा है बरसों से ,...
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