पथ का राही
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Sunday, 26 January 2014
इस दुनियावी सफ़र में अब रखा क्या है.
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सफ़र है जिंदगी, और यहाँ होता क्या है; जो भी मिलता है, वो भी मिलता क्या है. जिंदगी के सफ़र पर निकले हो तुम; सिवा मौत के अपना पराय...
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Saturday, 30 November 2013
एहसास
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जब भी एहसास इतने गहरे हुए कि ज़ुबान बयाँ न कर सके मुझे मेरा मौन अच्छा लगा लहरों की आवाज़ और पंछी की चहक अच्छी लगी और लगा की ख...
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Thursday, 24 October 2013
ओ साधु रे ........
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ओ साधु रे ........ ओ साधु रे ........ साधु नाम पाया, लेकिन जिया कहाँ रे. रे साधु जिया कहाँ रे. साधु मन पाया, लेकिन बचा कहाँ र...
Friday, 11 October 2013
दर्द यूँ भी अदाओं से कम निकलता है.
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यमुना प्रसाद दूबे 'पंकज' जी ने आग़ाज किया था उसी को अंजाम देने की कोशिश है । ग़ज़ल का मतला,ख़ास आप की महफिल के लिये ,,,,,,,,,,,...
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Friday, 13 September 2013
बहुत अदना सा रह गया है इंसान
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बहुत अदना सा रह गया है इंसान तुम्हारे अल्लाह और तुम्हारे भगवान के आगे उसे मरना पड़ता है कभी तुम्हारे अल्लाह के नाम पर कभी तुम्हारे भग...
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Monday, 9 September 2013
देहिये के भेद न जाने इ देहिया
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गईया बछरुआ मोहे मन भाए ... कि जाने कौने माटी से बनल ई देहिया ... जबे हम सोची इहे मन आवे ... जाने कौने माटी मे मिलि जाई देहिया ... त...
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Sunday, 18 August 2013
मोहब्बत तो फकीरी से ही जिंदा है
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जाने फिर क्यूँ मुझे वो याद आया; जाने फिर क्यू ये ख़याल आया. जिस्म दो हैं, उसका और मेरा; जिसमें बसता है एक ही साया. सुबह औ...
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