पथ का राही
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Friday, 25 May 2012
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अचानक एक ख़याल आया; जीवन के सन्दर्भ में प्रेम और भोग के सन्दर्भ में. प्रेम एक उन्मुक्त आकाश देता है; जिसमे आप हर तरह के बंधन ...
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सोचता हूँ जब भी मैं कि जिंदगी ये जी लिया; देखता हूँ मैं कि सब कुछ अधूरा रह गया. वासना की भूख को जीवन भटकता ही रहा; प्रेम अमृत के...
Sunday, 6 May 2012
खोजता हूँ खुद को खुद को जानता नहीं.
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इस तरफ भी वही है, वो ये मानता नहीं; कैसे हों पार तैरना तो जानता नहीं. अब तक मेरे वजूद को झुठला रहा है वो; कहता है कि मुझ को पहचा...
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Sunday, 25 March 2012
जिंदगी पूछ ही लेती है जीने का सबब
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हर कदम चल के,मैं सोचता हूँ,ये क्या हुआ; जब ठहरता हूँ,तो पूछता हूँ,अब क्या हुआ. तू दौड़ कर बहुत दूर निकल जाए तो क्या; देखना तुझपे,तेरे होने क...
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Friday, 23 March 2012
और मैं!!
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१. अझुली भर फूल/ प्यार भरा दिल/ आकाश मे उड़ता पंछी/ और मैं. २. बहती हुई नदिया/ उड़ता हुआ बादल/ हवाओं मे खुशबू/ और मैं. ३. पेड़ पर पत्ते/ पत्...
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Wednesday, 21 March 2012
अपने गाँव की ज़मीं
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अब तो लगता है की मुर्दा हो गया हूँ मैं. शहर में आकर देख तो कैसा हो गया हूँ मैं; देख कर गाँव की ज़मीं, पेड़ और घर की देहरी; छलक आये आँसू, तो ...
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Monday, 19 March 2012
है बस प्रेम की संभावना
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निश्तेज हो फिर सूर्य भी; उतर आए यदि मेरे मन आकाश में. है मेरी ये सौम्यता; निर्विकार सी, चंद्रमा सी ही सधी. पृथ्वी सी सहनशीलता;...
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