Saturday, 18 January 2020

शृष्टि में निरंतर प्रवाहित प्रेम

अभिभूत हूँ उस प्रेम से,
जो घटित हुआ एक पल में,
और जीवंत रहेगा, सदियों तक।

एक अपरिचित का प्रेम,
उस के पलकों के कोरों पर रुके,
अश्रु के दो बूँद,
जो उस के चेहरे पर सरकने से पहले,
उतर चुके थे मेरे हृदय पर प्रेम बन कर।

वो भाव जो उस के चेहरे,
आँखों में देख सकता था,
उस के चेहरे पर पढ़ सकता था,
वो उस का मेरे ओर हाथ बढ़ाना,
प्रेम ऊर्जा का हृदय तक पहुँच जाना।

सब घटित होता है, उस पल में,
बिना किसी अपेक्षा के,
बिना किसी कर्ता भाव के,
प्रेम यूँ ही घटित होता है निश्छल,
शृष्टि में निरंतर प्रवाहित प्रेम।

© Gyanendra Tripathi

Thursday, 16 May 2019

रे साधो सध जाना

रे साधो सध जाना,
प्रेम, प्रीति के बंधन में
बँध जाना, सध जाना

प्रेम भए जग उपजे
ध्यान धरे जग छूटे
ध्यान धरे प्रेम जो होवे
जग में जग छूटे
साधो सध जाना

तन के माटी, मन के फेरे
लगे जगत के फेरे
ध्यान प्रेम से टूटे बंधन
टूटे जगत के फेरे
साधो सध जाना
© Gyanendra

Monday, 13 May 2019

मुझे बता देना

तुम्हें कहीं अगर मिल जाऊँ मैं,
तो मुझे बता देना।

रात के किसी उजियारे में,
दिन के किसी अँधियारे में,
तुम्हें कहीं अगर मिल जाऊँ मैं,
तो मुझे बता देना।

पर्वत झील पहाड़ नदी या,
जीवन के भीतर गलियारे में,
तुम्हें कहीं अगर मिल जाऊँ मैं,
तो मुझे बता देना।

और कहीं जो ठहर सके तुम,
गहरे भीतर मन के द्वारे,
तुम्हें कहीं अगर मिल जाऊँ मैं,
तो मुझे बता देना।

© Gyanendra

Friday, 26 January 2018

राम

अगर कोई विकास से लेकर राष्ट्रवाद तक के
इस दस मुख वाले रावण का अंत कर दे 
तो मैं माँ लूँगा की राम हैं 

अगर कोई अर्जुन की तरह 
संशय में पड़ी जनता का संशय ख़त्म कर दे 
तो मैं माँ लूँगा की वो कृष्ण है 

अगर को भय की शिला पर 
बैठे हुए बाज़ारवाद से मुक्त कर दे 
तो मैं जान जाऊँगा की बुद्ध आ गए 

अगर कोई प्रेम और सद्भाव 
को सब के मन में स्थापित कर दे 
तो मैं जाऊँगा की मैं मसीह से मिला 

अगर कोई इस बाज़ारवादी 
रेगिस्तान में जीने का तरीक़ा पैदा कर दे 
तो समझ लेना वो पैग़म्बर से ज्यादे गुणवान है

प्रेम

प्रेम मुझे बहता हुआ अनुभव होता है 
शरीर में बह रहे रक्त में ही नहीं 
मेरे समस्त अस्तित्व की ऊर्जा में 
और तुम अब भी 
दूसरी तरफ़ खड़े हो कर तय कर रहे हो 
कि मैं क्या सोचता हूँ 
और किस तरह का व्यक्ति हूँ 
तो सच मानो तुम उसे खो दोगे 
हमेशा के लिये
जिसे तुम अभी मिल भी न सके थे 

Wednesday, 26 July 2017

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है
की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष
खाना पकाने में कुशल होते हैं

क्यों की सुंदर वही होता है
जो भीतर मन से पका हुआ (परिपक्व) हो
जो ख़ुद को पकाने में कुशल हो

और दुनिया की सारी बहादुर स्त्रियाँ
निकलती हैं घर से बिना परवाह किए
की कौन क्या सोचता है, या कहता है

क्यों की बहादुर वही होता है
जो स्वयं को यूँ जीत ले
कि दूसरों की परवाह न करे

दुनियाँ के सारे सुंदर पुरुष
हार जाते है बहादुर स्त्रियों से
प्रेम में हार जाना ही जीत है

Sunday, 30 April 2017

In the nature, and the nature

Some time I do think,
does it really make a sense, what so ever I am
or, who soever I am
but then I do have to think
do the flower knows,
what is the sense of being flower,
or being the flower as like it is
Why it is red and not blue or yellow
moreover, does the flower have sense, to sense it
and then I realize deep in me
It's all in nature
the way it is
and so am I
In the nature, and the nature
here and forever
...................

जीवन सफ़र

 सबके अपने रास्ते अपने अपने सफ़र  रास्तों के काँटे अपने  अपने अपने दर्द अपनी अपनी मंज़िल अपना अपना दुख अपनी अपनी चाहते अपना अपना सुख सबकी अप...