लौट कर तुमको मिलेंगे फिर वहीं;
रास्ते जाते कहाँ हैं फिर कहीं.
चलना है, बस चलना ही है जिंदगी;
हैं कहाँ, कोई यहाँ मंज़िल कहीं.
तुम किनारों पर भले महफूज़ हो;
हो समंदर के बिना कुछ भी नहीं.
चाहतों को इस कदर न चाहना;
कि जिंदगी को लगे, है ही नहीं.
'मुसाफिर' हो आज़ाद दिल से सोचना;
कि जिंदगी क्या है, और क्या नहीं.



