पथ का राही

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Friday, 24 February 2017

प्रेम की परिभाषाएँ

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प्रेम की सारी परिभाषाएँ तुम पर आ कर पेड़ के पीले पड़ गये पत्तों सी पतित हो जाती हैं प्रेम के एक क़तरा अनुभव के आगे शब्दों का सारा समुद्र जै...
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Friday, 3 February 2017

हम ने गुलाब-ए-अश्क़ भी देखे है यहाँ पर

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तुम दूर सही दूर से भी बात अगर हो लहरों का साहिल से मुलाक़ात अगर हो मुनासिब हो तो ठहरो की है शाम अभी दूर ज़िंदगी की सुबह है, समझदार अगर ...
Thursday, 15 December 2016

बहुत कुछ लिख दिया जाता है दिल और दिमाग़ पर

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१) बहुत कुछ लिख दिया जाता है दिल और दिमाग़ पर कविता या कहानी लिखने के पहले काग़ज़ पर सिर्फ़ बिम्ब है मन के गहरे तल पर जीवन्त हैं अनुभ...
Wednesday, 26 October 2016

ख़्वाब के पार

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जब भी सोचा ज़िंदगी में ख़्वाब के पार चलूँ, ज़िंदगी ख़्वाब है, सोचा कि इस के पार चलूँ। कह लो जो चाहो, शायद ये आख़िरी पल हो, कि सोचता हूँ...
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Sunday, 14 August 2016

'I' between me and myself

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I try to know who I am As the journey started from birth So to know who I am I have to give birth again, to my self With this effort o...
Thursday, 28 July 2016

वक़्त कभी नहीं ठहरता

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पता नहीं तुम्हें अब भी पता है की नहीं की ज़िंदगी की मुश्किलें मुझे तुम्हारे और क़रीब ले जातीं है और अधखुली खिड़की से आती हवा आधीअधूरी ज़िंद...

ज़िंदगी जैसे ऊन का गोला

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ज़िंदगी जैसे ऊन का गोला एक सिरा पकड़ कर हम उलझ जाते हैं ताना बाना बुनने में और बुनते उलझते कब आख़िरी सिरा आ जाता है पता ही नहीं चलता
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musafir
मै हूँ खोया हुआ अंधेरों में, है रोशनीं की तलाश मुझे. वो मुझमें ही कही बसता है, बस उसकी है तलाश मुझे.
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