पथ का राही

▼
Thursday, 16 February 2012

गर्दिश-ए-शाम बन गया हूँ मैं

›
गर्दिश-ए-शाम बन गया हूँ मैं;  तेरे पहलू से जो उठ गया हूँ मैं. आईना देखता हूँ, मैं तुझको पाता हूँ; कि नज़र हो तेरी, और...
15 comments:
Thursday, 2 February 2012

काश मैं बदल सकता वक़्त

›
गुज़रते हुए देखें हैं, साल कई; गुज़रते हुए देखें हैं, लोग कई. पर दर्द असहनीय और गहरा देखा; जब बेटे को पिता के कंधों पर जाता देखा. काल से पू...
13 comments:
Friday, 30 December 2011

जिंदगी का राज

›
मुझे ये जिंदगी का राज समझ आया करीने से, कि खुश्बू फूल की आती है मेहनत करके जीने से। तुम्हे कतरा कह कर लोग ठुकराए तो भी क्या, समंदर बनके निकल...
5 comments:
Friday, 28 October 2011

जिंदगी क्या है

›
जिंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो; मोहब्बत क्या है किसी को अपना बनाकर देखो. सफ़र जिंदगी का है नये रास्तों से ही; जिंदगी क...
18 comments:
Sunday, 25 September 2011

मैं तुमसे अलग!

›
शाखों से अलग पत्ते , हवा के हल्के झोंके से दूर चले जाते हैं । मैं तुमसे अलग , इतना जड़ कैसे हूँ । जंगल में पेड़ से अलग ...
12 comments:
Wednesday, 14 September 2011

तुम सुगंध हो मेरी

›
तुम सुगंध हो मेरी मैं पवन हूँ तेरा मिल तू जाए अगर तो ये जीवन मेरा । चाँद को चाहिए चाँदनी , और क्या तू नहीं है तो फिर क्या...
9 comments:
Wednesday, 17 August 2011

मेरे कातिल

›
पास आ कातिल मेरे मुझमें जान आने दे , जान ले लेना पर थोडा तो संभल जाने दे। तू तसव्वुर में मेरे रहा है बरसों से ,...
24 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
musafir
मै हूँ खोया हुआ अंधेरों में, है रोशनीं की तलाश मुझे. वो मुझमें ही कही बसता है, बस उसकी है तलाश मुझे.
View my complete profile
Powered by Blogger.