पथ का राही
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Saturday, 30 January 2016
प्रेम-वासना-बुद्ध
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सच यही है, तुम्हें पहली बार देखते ही जो भावनायें उठीं उस में प्रेम और वासना दोनों थे परन्तु एक आकर्षण जो तुम्हारे चेहरे पर था वो तुम्हा...
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Thursday, 28 January 2016
जिंदगी-ट्रेन-लड़की-चाय
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ट्रेन डब्बा मुसाफिर जिंदगी तेज धीमी रफ़्तार समय भागते हांफाते आराम बैठे तो रेत जैसे जिंदगी हथेली किसी के हाथ में फिसल जाता है, हाथ भी...
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Saturday, 23 January 2016
ज़िंदा मुर्दों के देश में
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वो रात जैसे ख़त्म ही न हो रही थी एक नौजवान की मौत हुई थी और जैसे सदियों के दर्द से करांहती आत्मायें नींद से जाग गयीं थीं और क...
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Monday, 18 January 2016
भाड़ में जाये तुम्हरी ये परम्परायें
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सुनो, जब तुम ब्राह्मण कहते हो मुझे तो मै सदियों से हो रहे दमन और अत्याचार का हिस्सेदार हो जाता हूँ पैदा होते ही तुम ने थोप दी है ये परम...
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Saturday, 19 December 2015
प्रेम-वासना
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प्रेम निर्लज्ज कर देता है स्त्री को खोल देती है अपना स्तन अपने बच्चे के लिये चलती ट्रेन या बस में वासना निर्लज्ज कर देती है पुरूष ...
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Monday, 16 November 2015
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बहुत कुछ पा लेने की दौड़ में बहुत कुछ छूट जाता है पीछे जैसे नदियाँ निकल जाती है दूर सागर से मिलने पीछे छोड़ जाती है सदियों का सफ़र इंस...
Tuesday, 27 October 2015
रोटियाँ
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(१) रोटियाँ चूल्हे पर पकती है सिर्फ़ रोटियाँ पकती है ऐसा तो नहीं है साथ में पक रहा होता है मन में प्रेम और कि किसे पता रोटियों मे ...
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